राम की शक्तिपूजा की व्याख्या भाग 6 | ram ki shaktipuja ki vyakhya | part 6
आज के इस लेख में आप ram ki shaktipuja ki vyakhya को पूरी तरह से समझ पाएंगे । कृपया इसे पूरा ज़रूर पड़ें ।
आज के इस लेख में आप ram ki shaktipuja ki vyakhya को पूरी तरह से समझ पाएंगे । कृपया इसे पूरा ज़रूर पड़ें ।
ram ki shaktipuja ki vyakhya
arth parivartan ki dishaen, arth vikas ki dishaen
Bhasha Vyavastha aur Bhasha Vyavahar
kavya gun bhartiya kavyashastra
महापंडित राहुल सांकृत्यायन ने देवनागरी लिपि के विषय में यह कहा है कि – “देवनागरी दुनिया की सर्वाधिक वैज्ञानिक लिपि है” । अब हम Devnagari Lipi Ki Vaigyanikta पर विस्तार से विचार करेंगे और यह समझने का प्रयास करेंगे कि क्या वास्तव में देवनागरी लिपि एक वैज्ञानिक लिपि है । देवनागरी लिपि की विशेषताओं का उल्लेख करते समय भी प्रायः यह कहा जाता है कि यह वैज्ञानिक लिपि है। प्रश्न यह है कि किसी लिपि को वैज्ञानिकता प्रदान करने वाले कौन से तत्त्व होते हैं? किसी भी लिपि की वैज्ञानिकता के आधार तत्व बताते हुए भाषाविदों ने मान है कि वह लिपि वैज्ञानिक लिपि हो सकती है जिसमें – • एक ध्वनि के लिए एक वर्ण हो। • एक वर्ण एक ही ध्वनि को व्यक्त करें। • मात्रा एवं वर्णचिह्नों में भिन्नता हो। • लेखन और उच्चारण में एकरूपता हो। • सरल एवं स्पष्ट हो । • उच्चारण एवं लेखन … Read more
पुरानी हिंदी क्या है | purani hindi kya hai
शब्दकोश का निर्माण अपने आप में एक बहुत जटिल और लंबी प्रक्रिया है। शब्दकोश बनाने की प्रारंभिक योजना से लेकर उसके छप जाने तक की प्रक्रिया काफी श्रम और समय की माँग करती है । यह जानकार आश्चर्य होता है कि ‘ऑक्सफोर्ड अंग्रेजी कोश’ को बनने में चालीस वर्ष लगे थे। यह कार्य 1888 में शुरू हुआ था और 1928 में समाप्त हुआ। कई बड़े ऐतिहासिक कोशों के पूरे खंडों को छपने में तो 100-150 वर्ष भी लग जाते हैं। आइये आज हम shabdkosh nirman ki prakriya को समझने का प्रयास करते हें । कोश-निर्माण का कार्य विभिन्न भाषा-समाजों में बहुत समय से होता आ रहा है। ज्ञान के क्षेत्र में जागरूक विद्वान इसे अपना दायित्व समझ कर निभाते रहे हैं। उदाहरण के रूप में हम “निघंटु” का नाम ले सकते हैं जो वैदिक संस्कृत कोश है। फालेन तथा जॉन शेक्सपियर द्वारा तैयार किए गए आरंभिक हिन्दी-अंग्रेजी कोश इसी कोटि … Read more
भाग-4 आये सब शिविर सानु पर पर्वत के मंथर सुग्रीव, विभीषण, जाम्बवान आदिक वानर, सेनापति दल-विशेष के अंगद, हनूमान, नल, नील, गवाक्ष प्रात के रण का समाधान करने के लिए, फेर वानर-दल आश्रम-स्थल। बैठे रघु-कुल-मणि श्वेत शिला पर निर्मल जल ले आए कर-पद-क्षालनार्थ पटु हनूमान, अन्य वीर सर के गए तीर संध्या-विधान, वंदना ईश की करने को, लौटे सत्वर, सब घेर राम को बैठे आज्ञा को तत्पर। पीछे लक्ष्मण, सामने विभीषण, भल्लधीर, सुग्रीव, प्रान्त पर पाद-पद्म के महावीर, यूथपति अन्य जो यथास्थान हो निर्निमेष देखते राम का जित सरोज मुख-श्याम-देश। सन्दर्भ – प्रस्तुत पंक्तियां छायावादी कवि सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ द्वारा रचित ‘राम की शक्ति पूजा’ से ली गई हैं। मूल रूप से यह कविता उनके काव्य संग्रह ‘अनामिका’ में संकलित है। प्रसंग – आज के युद्ध का यद्यपि कोई निर्णय नहीं हो सका था, किन्तु राक्षसों का पलड़ा भारी रहा था। रावण ने प्रबल पराक्रम का परिचय दिया था। सूर्यास्त … Read more