अनुसंधान का अर्थ, स्वरूप और विशेषताएं | Anusandhan Ka Arth, Swarup Aur Visheshtaen

8 min read
anusandhan ka arth, awarup aur visheshtaen

अनुसंधान’ के लिए अनेक पर्यायवाची शब्दों का प्रयोग किया जाता, जिनमें ‘अन्वेषण’ और ‘शोध’ प्रमुख हैं । अँग्रेजी में ‘रिसर्च’ शब्द का प्रयोग किया गया है, जिसका अर्थ ‘अन्वेषण’ है ।   (अन्वेषण = खोजना, ढूँढ़ना)   अनुसंधान क्या है ? वस्तुतः अनुसंधान की परिभाषा में यह अर्थ है कि जो संधान (संधान का अर्थ है दिशा) के लिए हो, जिसमें खोजना और प्रमाणित करना हो । ‘शोध’ शब्द का प्रयोग अब ‘रिसर्च’ के अर्थ में होने लगा है । जब किसी भी साहित्य या विज्ञान या समाज विज्ञान के सृजनात्मक स्वरूप का मूल्याँकन होता है और नई व्याख्या की जाती है तब उसे अनुसंधान कहा जाता है । डॉ. हजारीप्रसाद द्विवेदी और डॉ. नगेंद्र ने अनुसंधान को परीक्षण या समीक्षण भी कहा है। डॉ नगेंद्र ने ‘अनुसंधान का स्वरूप’ शीर्षक के अंतर्गत अनुसंधान की परिभाषा करते हुए कहा है – “संधान का अर्थ है दिशा और अनु का अर्थ है पीछे । इस प्रकार अनुसंधान का अर्थ किसी लक्ष्य को सामने रखकर … Read more

अनुसंधान (Research) और आलोचना (Criticism)| Anusandhan aur Alochana

7 min read

अनुसंधान (शोध) और आलोचना (समालोचना, समीक्षा) को पर्यायवाची समझना सही नहीं है, क्योंकि दोनों में आधारभूत अंतर है। शब्दकोशों में दोनों की अलग-अलग परिभाषा दी गई है । वेब्स्टर की ‘न्यू वर्ल्ड डिक्शनरी’ में ‘अनुसंधान’ को परिभाषित करते हुए ‘इसे व्यवस्थित, सावधानीपूर्वक और संतुलित अन्वेषण (खोज, ढूंढ़ना) कहा गया है, जिसमें ज्ञान के किसी विशेष क्षेत्र में स्थापित तथ्यों या सिद्धांतों की खोज की जाती है ।’   आलोचना में विश्लेषण के आधार पर निर्णय करने की प्रक्रिया होती है । साहित्य या कला के संबंध में विश्लेषण की विभिन्न प्रणालियों का समालोचना में प्रयोग किया जाता है ।समालोचना विश्लेषण के उपरांत मूल्यांकन भी करती है । ‘न्यू वर्ल्ड डिक्शनरी’ में ही निर्णय करने की प्रक्रिया को आलोचना कहा गया है। कलात्मक संसार का समालोचनात्मक विश्लेषण और उसका मूल्यांकन आवश्यक है । समालोचक की कला यह है कि वह साहित्य पर अपनी टिप्पणी दे। उसकी समीक्षा करे और साथ ही … Read more

अनुसंधान के मूल तत्व | Anusandhan ke Mool Tatva

9 min read

अनुसंधान के मूल तत्व का आधार उसकी प्रक्रिया में निहित वे सारे तत्व हैं जिनसे अनुसंधान आरंभ से अंत तक जुड़ा रहता है । शोध के लिए एक दृष्टिकोण के साथ ही वह प्रक्रिया भी जुड़ी रहती है जिससे गुजरना पड़ता है । अनुसंधान के लिए विश्वविद्यालयों में अनेक नियम निर्धारित किए गए हैं जो वस्तुतः शोध उपाधि के प्रयोजन से विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं । आज हम anusandhan ke mool tatva को समझने का प्रयास करेंगे ।  अनुसंधान के मूल तत्वों में सर्वप्रथम विषय का चयन आवश्यक है । उसके उपरांत रूपरेखा निर्माण, सामग्री संकलन, शोध प्रबंध लेखन और व्यवस्थापन इन सभी तत्वों से मिलकर अनुसंधान की रचना होती है । जिसके लिए अन्वेषक और निर्देशक आवश्यक हैं । इन सभी तत्वों को विशेष रूप से विश्लेषित किया जाएगा, किन्तु अनुसंधान के तत्वों को संक्षेप में इस प्रकार रखा जा सकता है : विषय चयन किसी भी शोध … Read more

अनुसंधान के प्रकार | Anusandhan ke Prakar

8 min read

अनुसंधान का क्षेत्र अत्यंत व्यापक है । साहित्य का अनुसंधान सामाजिक और वैज्ञानिक अनुसंधान से अलग ही होता है, क्योंकि उसके रचनात्मक परिवेश में केवल बिम्बात्मक भाषा का प्रयोग ही नहीं सृजनात्मक संवेदना की भी अभिव्यक्ति होती है । अतः अनुसंधान के विभिन्न आयामों से जुड़कर इसकी अनेक प्रणालियों का विकास होता है । इस आधार पर ही अनुसंधान के विभिन्न प्रकारों का विवेचन किया जाता है ।आज यहां हम anusandhan ke prakar का विस्तार से अध्ययन करेंगे ।  हिन्दी साहित्य में अनेक विधाओं को प्रयोग में लाया जाता है । साहित्य को विषयवस्तु, भाव, विचार, शिल्प और भाषा के आधार पर अन्वेषित किया जाता है । इस आधार पर अनुसंधान के भी अनेक प्रकार होते हैं, जिनका विवेचन इस प्रकार हो सकता है : वस्तु तथ्यात्मक अनुसंधान  किसी भी रचना विशेषकर गद्य रचना में, जिसका संबंध कथा साहित्य, नाटक महाकाव्य से है, वस्तु तत्व की प्रमुखता होती है । … Read more

शोध के लिए ‘सिनोप्सिस’ (रूपरेखा) कैसे तैयार करें | Shodh Ke Lie Synopsis Kaise taiyar Karen

9 min read

आज जो तथ्य, विषय अज्ञात है, उसे जानना ही अनुसंधान है। अनुसंधान कार्य करने से पहले सर्वप्रथम विषय का चुनाव करना होता है।अनुसंधान-प्रक्रिया का दूसरा सोपान निर्देशक का चुनाव है । उनके बिना अनुसंधान-कार्य की कल्पना करना असंभव है । अनुसंधान-प्रक्रिया में विषय का चुनाव कर लेने के बाद अगले पड़ाव अथवा लक्ष्य के रूप में ‘रूपरेखा’ तैयार करने का कार्य करना होता है । इसे अँग्रेजी में ‘सिनोप्सिस’ कहते हैं, जिसे तैयार करना सर्वाधिक महत्वपूर्ण कार्य होता है । अनुसंधान की सफलता का पहला चरण है, रूपरेखा तैयार करना । आज हम shodh ke lie synopsis kaise taiyar karen विषय का विस्तृत विवेचन करेंगे और इसे विस्तार से समझने का प्रयास करेंगे । ‘रूपरेखा’ या ‘प्रारूप’ शोधकार्य का बीज है, जिसका सम्पूर्ण विकास शोध-प्रबंध के विस्तृत वटवृक्ष के रूप में होता है । यह प्रबंध को मूर्त रूप देता है । दूसरे शब्दों में यह कहा जा सकता है कि शोध-विषय का क्रमिक अर्थात् अध्यायों, … Read more

error: Content is protected !!
↑