राम की शक्तिपूजा की व्याख्या भाग 8 | ram ki shaktipuja ki vyakhya | part 8

ram ki shaktipuja ki vyakhya part 8

बैठे मारुति देखते राम चरणारविंद- युग अस्ति नास्ति के एक रूप गुण-गण अनिंद्य साधना मध्य भी साम्य वाम कर दक्षिण पद दक्षिण कर तल पर वाम चरण, कपिवर गद्गद् । पा सत्य सच्चिदानंद रूप विश्राम धाम जपते सभक्ति अजपा विभक्त हो राम नाम ।। युग चरणों पर आ पड़े अस्तु वे अश्रु युगल देखा कपि ने … Read more

राम की शक्तिपूजा की व्याख्या भाग 7 | ram ki shaktipuja ki vyakhya | part 7

ram ki shaktipuja ki vyakhya part 7

प्रस्तुत पंक्तियां छायावादी कवि सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ द्वारा रचित ‘राम की शक्ति पूजा’ से ली गई हैं। मूल रूप से यह कविता उनके काव्य संग्रह ‘अनामिका’ में संकलित है।

भारतेन्दु मण्डल के साहित्यकार | Bhartendu Mandal ke Sahityakar

bhartendu mandal ke sahityakar

भारतेन्दु हरिश्चंद्र के प्रभाव से उनके इर्द-गिर्द साहित्यकारों का एक खासा मण्डल तैयार हो गया था जिन्हें ‘भारतेन्दु मण्डल’ कहा जाता है।

आरम्भिक हिंदी की व्याकरणिक विशेषताएं | Arambhik Hindi ki Vyakaranik Visheshtaen

arambhik hindi ki vyakaranik visheshtaen

Arambhik hindi ki vayakaranik visheshtaon ko samjhane ke lie is lekh ko pura padhie .

अवहट्ट की व्याकरणिक विशेषताएँ | Avahatta ki Vyakaranik Visheshtaen

Avahatta ki Vyakaranik Visheshtaen

Avahatta ki Vyakaranik Visheshtaen

ब्रजभाषा का साहित्यिक भाषा के रूप में विकास|Brajbhasha ka Sahityik Bhasha ke Roop men Vikas

brajbhasha ka sahityik bhasha ke roop men vikas

Brajbhasha ka Sahityik Bhasha ke Roop men Vikas

खड़ी बोली का साहित्यिक भाषा के रूप में विकास | Khadi Boli ka Sahityik Bhasha ke Roop men Vikas

Khadi Boli ka Sahityik Bhasha ke Roop men Vikas

Khadi Boli ka Sahityik Bhasha ke Roop men Vikas

आरम्भिक हिंदी की प्रमुख विशेषताएँ | Arambhik Hindi ki Pramukh Visheshtaen

arambhik hindi ki pramukh visheshtaen

आरम्भिक हिंदी को प्रारंभिक हिंदी, प्राचीन हिंदी अथवा पुरानी हिंदी के नाम से भी जाना जाता है। चंद्रधर शर्मा गुलेरीजी के शब्दों में “अपभ्रंश का परवर्ती रूप ही पुरानी हिंदी है।” आरम्भिक हिंदी, अपभ्रंश से विकसित अवहट्ट तथा आधुनिक भारतीय आर्यभाषाओं के बीच की कड़ी है । उत्तरकालीन अपभ्रंश पुरानी हिंदी से साम्य रखता था। यही स्थल पुरानी हिंदी  का … Read more

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