पूर्वी हिंदी की बोलियाँ और उनकी विशेषताएं | Purvi Hindi ki Boliyan aur Unki Visheshtaen

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purvi hindi ki boliyan aur unki visheshtaen

पूर्वी हिंदी का वही क्षेत्र है जो प्राचीन काल में उत्तर कोसल और दक्षिण कोसल था। उत्तर कोसल की बोली अवधी और दक्षिण कोसल की छत्तीसगढ़ी है। इन दो खण्डों के बीच में शताब्दियों तक बघेल राजपूतों का राज्य रहा है। बघेलखण्ड की एक राजनीतिक इकाई होने के कारण उसकी बोली बघेलखण्डी या बघेली को भी लोग अलग बोली मानते हैं। इस प्रकार पूर्वी हिंदी उपभाषा (बोली-वर्ग) के अंतर्गत आने वाली तीन प्रमुख बोलियां अवधी, बघेली और छत्तीसगढ़ी हैं ।

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डॉ. नगेन्द्र की आलोचना दृष्टि | Dr Nagendra Ki Alochana Drishti

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Dr Nagendra ki Alochana Drishti

अलीगढ़ (उ.प्र.) जिले के ‘अतरौली’ नामक कस्बे में जन्मे, नागपुर और आगरा से पढ़े-लिखे तथा दिल्ली विश्वविद्यालय में शिक्षक रहे डॉ. नगेन्द्र (09.03.1915-27.10.1999) ने काव्यशास्त्र और आलोचना के क्षेत्र में अत्यंत महत्वपूर्ण और वृहद् कार्य किया है । आज हम Dr Nagendra ki Alochana Drishti को विस्तार से समझने का प्रयास करेंगे ।

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राम की शक्तिपूजा की व्याख्या भाग 12 | ram ki shaktipuja ki vyakhya | part 12

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ram ki shaktipuja ki vyakhya part 12

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राम की शक्तिपूजा की व्याख्या भाग 11 | ram ki shaktipuja ki vyakhya | part 11

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ram ki shaktipuja ki vyakhya part 11

प्रस्तुत पंक्तियां छायावादी कवि सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ द्वारा रचित ‘राम की शक्ति पूजा’ से ली गई हैं। मूल रूप से यह कविता उनके काव्य संग्रह ‘अनामिका’ में संकलित है।

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राम की शक्तिपूजा की व्याख्या भाग 10 | ram ki shaktipuja ki vyakhya | part 10

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ram ki shaktipuja ki vyakhya bhag 10

प्रस्तुत पंक्तियां छायावादी कवि सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ द्वारा रचित ‘राम की शक्ति पूजा’ से ली गई हैं। मूल रूप से यह कविता उनके काव्य संग्रह ‘अनामिका’ में संकलित है।

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राम की शक्तिपूजा की व्याख्या भाग 9 | ram ki shaktipuja ki vyakhya | part 9

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ram ki shaktipuja ki vyakhya bhag 9

प्रस्तुत पंक्तियां छायावादी कवि सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ द्वारा रचित ‘राम की शक्ति पूजा’ से ली गई हैं। मूल रूप से यह कविता उनके काव्य संग्रह ‘अनामिका’ में संकलित है।

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राम की शक्तिपूजा की व्याख्या भाग 8 | ram ki shaktipuja ki vyakhya | part 8

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ram ki shaktipuja ki vyakhya part 8

बैठे मारुति देखते राम चरणारविंद- युग अस्ति नास्ति के एक रूप गुण-गण अनिंद्य साधना मध्य भी साम्य वाम कर दक्षिण पद दक्षिण कर तल पर वाम चरण, कपिवर गद्गद् । पा सत्य सच्चिदानंद रूप विश्राम धाम जपते सभक्ति अजपा विभक्त हो राम नाम ।। युग चरणों पर आ पड़े अस्तु वे अश्रु युगल देखा कपि ने चमके नभ में ज्यों तारा दल ।। सन्दर्भ प्रस्तुत पंक्तियां छायावादी कवि सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ द्वारा रचित ‘राम की शक्ति पूजा’ से ली गई हैं। मूल रूप से यह कविता उनके काव्य संग्रह ‘अनामिका’ में संकलित है। प्रसंग राम को अपनी कल्पना में ऐसा लगा जैसे रावण उनकी विवशता पर अट्टहास कर रहा है और यह कह रहा है कि देखो मैंने तुम्हारी पत्नी सीता का हरण किया है, किन्तु तुम मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकते, क्योंकि शक्ति मेरे वश में है। अपनी असहायता एवं विवशता पर राम के भावपूर्ण नेत्रों से दो बूंद आँसू टपक पड़े। हनुमान … Read more

राम की शक्तिपूजा की व्याख्या भाग 7 | ram ki shaktipuja ki vyakhya | part 7

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ram ki shaktipuja ki vyakhya part 7

प्रस्तुत पंक्तियां छायावादी कवि सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ द्वारा रचित ‘राम की शक्ति पूजा’ से ली गई हैं। मूल रूप से यह कविता उनके काव्य संग्रह ‘अनामिका’ में संकलित है।

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नाथ-साहित्य की प्रमुख की विशेषताएँ | Nath Sahitya ki Pramukh Visheshtaen

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nath sahitya ki pramukh visheshtaen

nath sahitya ki pramukh visheshtaon ko samjhane ke lie is article ko pura padhen .

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भारतेन्दु मण्डल के साहित्यकार | Bhartendu Mandal ke Sahityakar

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bhartendu mandal ke sahityakar

भारतेन्दु हरिश्चंद्र के प्रभाव से उनके इर्द-गिर्द साहित्यकारों का एक खासा मण्डल तैयार हो गया था जिन्हें ‘भारतेन्दु मण्डल’ कहा जाता है।

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