राम की शक्तिपूजा की व्याख्या भाग-14| Ram Ki Shaktipuja Ki Vyakhya Part-14
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प्रस्तुत पंक्तियां छायावादी कवि सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ द्वारा रचित ‘राम की शक्ति पूजा’ से ली गई हैं। मूल रूप से यह कविता उनके काव्य संग्रह ‘अनामिका’ में संकलित है। विभीषण ने राम की निराशा को दूर करने के लिए जो प्रोत्साहन भरे हुए शब्द कहे, राम पर उनका कोई विशेष प्रभाव न पड़ा। ऐसा लगा जैसे उन ओजस्वी शब्दों में अर्थ व्यक्त करने की शक्ति ही न थी। कुछ क्षणों के उपरान्त राम ने सारी सभा को सम्बोधित करते हुए वस्तुस्थिति से अवगत कराया कि इस युद्ध में देवी रावण की सहायता कर रही है इसलिए अब हमें विजय प्राप्त नहीं होगी। मुझे दुख है तो केवल इस बात का कि अब देव शक्तियां भी अन्याय एवं अधर्म का साथ दे रही हैं। ऐसा कहते ही उनकी आँखों में आँसू भर आए तथा जामवन्त, विभीषण, सुग्रीव, हनुमान, लक्ष्मण इस बात को जानकर भीतर ही भीतर कसमसाने लगे। कवि ने इसी…