काव्य के लक्षण – भारतीय काव्यशास्त्र | Kavya Ke Lakshan – Bhartiya Kavyashastra

12 min read

संस्कृत काव्यशास्त्र में काव्य के स्वरूप पर पर्याप्त विचार-विमर्श हुआ है, जिससे विभिन्न काव्य सम्प्रदायों का विकास हुआ और काव्य के प्रमुख तत्वों की चर्चा करते हुए kavya ke lakshan निर्धारित करने का प्रयास किया गया। विद्वानों में मतभेद होने के कारण काव्य की कोई सर्वमान्य परिभाषा प्रस्तुत करने में वे सफल नहीं हो सके। आचार्यों ने अपने-अपने मत को प्रमुखता देते हुए जो kavya ke lakshan निर्धारित किए हैं, वे सर्वमान्य नहीं कहे जा सकते।  अब हम कालक्रमानुसार संस्कृत आचायों द्वारा दिए गए काव्य लक्षणों पर विचार करने के उपरांत हिंदी के प्रमुख आचार्यों द्वारा निर्दिष्ट काव्य लक्षणों पर विचार करेंगे। इसके बाद  अंग्रेजी के प्रमुख समीक्षकों द्वारा दी गई काव्य की परिभाषाओं का अध्ययन करेंगे। संस्कृत आचार्यों द्वारा निर्दिष्ट काव्य लक्षण Kavya Lakshan आइये सबे पहले संस्कृत के आचार्याओं द्वारा बताए गए kavya ke lakshan का अध्ययन करते हैं । भामह (छठी शताब्दी) भामह ने अपने ग्रंथ ‘काव्यालंकार’ में काव्य की परिभाषा … Read more

error: Content is protected !!
↑