नाटक के तत्व | Natak Ke Tatva

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हिंदी नाटक के स्वरूप निर्माण में भारतीय और  पाश्चात्य दोनों ही नाट्य दृष्टियों का योगदान रहा है। अतः भारतीय और पाश्चात्य नाट्य तत्वों की संक्षिप्त जानकारी आवश्यक है। भारतीय नाट्य सिद्धांत संस्कृत के नाटकों के आधार पर निर्मित हुए थे तथा पश्चिमी नाट्य सिद्धांतों का आधार यूनानी नाटक थे। भारतीय आचार्यों ने नाटक के तीन अनिवार्य तत्व माने हैं–वस्तु, नेता और रस। वस्तु का अर्थ है  कथावस्तु, नेता यानी पात्र और रस यानी रचना से उत्पन्न होने वाला प्रभाव या उसकी अनुभूति। अर्थात् रचनाकार द्वारा अनुभूत सत्य की दर्शक अथवा पाठक को प्रतीति अथवा अनुभूति । पाश्चात्य आचार्यों ने नाटक के छह तत्व माने हैं:  कथावस्तु, पात्र, देशकाल, संवाद, शैली और उद्देश्य। इसके अलावा वहाँ संकलन-त्रय यानी नाटक में स्थान, समय और काल की एकता पर भी जोर दिया गया है। पश्चिम में सुखांत (Comedy) और दुखांत (Tragedy) दो तरह के नाटकों का प्रचलन रहा है जो क्रमशः कामदी (Comedy) और … Read more

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