प्रशासनिक कार्यों में अनुवाद की भूमिका | Prashasanik Karyon Men Anuvad Ki Bhumika

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 राजभाषा अधिनियम, 1963 (यथा संशोधित, 1967) के प्रावधानों के अनुसार संघ सरकार के राजकाज में द्विभाषिकता की स्थिति आ गई जिसके अनुसार सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को अपने शासकीय कार्य हिंदी अथवा अँग्रेजी में करने की छूट दी गई तथा उक्त अधिनियम की धारा 3(3) के अंतर्गत आने वाले सभी कागजात हिंदी और अँग्रेजी में द्विभाषी रूप में प्रस्तुत करने की सांविधिक व्यवस्था की गई । आज हम prashasanik karyon men anuvad ki bhumika विषय का विस्तृत विवेचन करेंगे और इसे समझने का प्रयास करेंगे। राजभाषा नियम 1976 (यथा संशोधित 1987) के अंतर्गत विभिन्न राज्यों के साथ केंद्र सरकार द्वारा किए जाने वाले पत्राचार की भाषा निर्धारित की गई है जिसके अनुसार ‘क’ क्षेत्र तथा ‘ख’ क्षेत्र में स्थित राज्यों में हिंदी तथा ‘ग’ क्षेत्र में स्थित राज्यों में अँग्रेजी में पत्राचार करने का प्रावधान किया गया है । इसके फलस्वरूप अनुवाद anuvad सरकारी कामकाज का एक अनिवार्य अंग बन गया है । प्रशासनिक हिंदी के विकास में अनुवाद की भूमिका अहम … Read more

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