सुमित्रानन्दन पन्त (1900-1977 ई.) की काव्य यात्रा के विविध चरण | sumitranandan pant ki kavyayatra ke vividh charan
कविवर सुमित्रानन्दन पन्त (sumitranandan pant) हिन्दी के एक ऐसे कवि हैं जिनकी कविता का स्वरूप एवं स्वर समय के साथ बदलता रहा। उनकी प्रारम्भिक कविताएं छायावादी काल की हैं जिनमें प्रकृति सौन्दर्य की प्रधानता है किन्तु बाद में उनकी कविताओं ने प्रगतिवाद का रास्ता अपना लिया। शोषण का विरोध करने वाली पन्त की प्रगतिवादी रचनाओं में गरीबों के प्रति सहानुभूति व्यक्त की गई है। कालान्तर में पन्त की काव्य यात्रा का विकास अन्तश्चेतनावादी कविताओं के रूप में हुआ जहाँ वे अरविन्द दर्शन से प्रभावित दिखाई पड़ते हैं। पन्त काव्य का चतुर्थ चरण नवमानवतावादी कविता का है, जहाँ वे ‘नवमानवता’ का सन्देश सुनाते दिखते हैं। आइए अब sumitranandan pant ki kavyayatra ke vividh charan का विस्तार से विवेचन करते हैं ।पन्त काव्य के इस क्रमिक विकास को चार चरणों में निम्न प्रकार विभक्त किया जा सकता है: … Read more