कॉलरिज का काव्यचिंतन | Coleridge ka Kavyachintan

27 min read

 शाब्दिक अर्थ में काव्य चिंतन का संबंध कविता के विषय में चिंतन से है। कविता क्या है? रस, छंद अलंकार तथा काव्यभाषा का कविता की सृजन प्रक्रिया में क्या योगदान है? काव्य चिंतन के केंद्र मेंऐसे ही बिंदु रहते हैं। एक दृष्टि से काव्य चिंतन वस्तुतः कविता संबंधितसैद्धांतिक समीक्षा है। पश्चिम में काव्य चिंतन की एक समृद्ध परंपरा रही है। कॉलरिज ऐसी समृद्ध काव्य चिंतन की परंपरा में सार्थक हस्तक्षेप करने वाले चिंतक के रूप में ख्यात हैं।  कॉलरिज का पूरा नाम सैमुअल टेलर कॉलरिज (Samuel Taylor Coleridge) है। इनका जन्म 21 अक्टूबर 1772 में इंग्लैंड के सेंट मेरी नामक स्थल पर हुआ। कॉलरिज अंग्रेजी के ‘लेक कवियों‘ (Lake Poets) में से एक थे। उनकी कविताओं में ‘दि राइम ऑफ दि एंसीएंट मैरीनर’ तथा ‘कुबलाखान’ अत्यंत प्रसिद्ध है।   आलोचनात्मक कृतियों में ‘बायोग्राफीया लिटरेरिया’, ‘चर्च एण्ड स्टेट’ तथा ‘कनफेशन्स ऑफ एन इनक्वाइरिंग स्प्रिट’ का उल्लेख किया जा सकता है। कॉलरिज … Read more

‘ध्रुवस्वामिनी’ नाटक की तात्त्विक समीक्षा | Dhruwswamini Natak ki Tatvik Samiksha

8 min read

बहुमुखी प्रतिभासम्पन्न श्री जयशंकर प्रसाद हिंदी के सर्वश्रेष्ठ नाटककार माने जाते हैं। ‘ध्रुवस्वामिनी’ (1933 ई.) उनकी बहुचर्चित नाट्यकृति है, जिसकी कथावस्तु गुप्त वंश के यशस्वी सम्राट समुद्रगुप्त के पुत्र चन्द्रगुप्त (द्वितीय) विक्रमादित्य के काल से सम्बन्धित है। अब हम  नाटक के तत्वों के आधार पर dhruwswamini natak ki tatvik samiksha करेंगे ।    नाटक की ‘भूमिका‘ में प्रसादजी ने इसकी ऐतिहासिकता के प्रमाण दिए हैं। उनके अनुसार ‘विशाखदत्त‘ द्वारा रचित संस्कृत नाटक ‘देवीचन्द्र गुप्त‘ में यह घटना अंकित है, जिसमें ध्रुवस्वामिनी का पुनर्विवाह चन्द्रगुप्त के साथ हुआ बताया गया है।  ‘ध्रुवस्वामिनी‘ जयशंकर प्रसाद की अंतिम एवं अत्यन्त महत्वपूर्ण अंतिम नाट्यकृति है। यह नाटक उनकी नाट्यकला का नवीन उन्मेष है। प्रसाद आरंभ में ही हिंदी नाट्यकला को जो एक निश्चित रूप प्रदान करना चाहते थे, ध्रुवस्वामिनी में उसकी प्रतिच्छवि देखी जा सकती है। इस नाटक में नाट्यवस्तु और नाट्यशिल्प का सम्यक् विनियोजन एवं सामंजस्य लक्षित होता है।   नाटक के तत्वों के … Read more

लघु कथा क्या है | Laghu Katha Kya Hai

4 min read

 ‘लघु कथा’ शब्द सम्भवतः अंग्रेजी के ‘शार्ट स्टोरी’ (Short Story) शब्द का अनुवाद है। वैसे ‘कहानी’ शब्द भी अंग्रेजी के ‘शार्ट स्टोरी’ के लिये ही प्रयुक्त होता है। ‘लघु कथा’ और ‘कहानी’ में तात्विक दृष्टि से कोई अंतर होता भी नहीं है। व्यावहारिक दृष्टि से ‘लघु कथा’ कहानी के छोटे रूप को अभिव्यक्त करती है। हमारे यहाँ लघुकथाओं की परंपरा बहुत पुरानी है। पुरानी लघु कथाएं वस्तुतः दृष्टांतों के रूप में विकसित हुई हैं। ऐसे दृष्टांत मुख्यतया नैतिक और धार्मिक क्षेत्रों में मिलते हैं। नैतिक दृष्टांतों को प्रकट करने वाली नैतिक लघु कथाएं सर्वत्र मिलती हैं, जैसे ‘पंचतंत्र’ की कथाएं, ‘महाभारत’, ‘बाइबिल’, ‘जातक’ आदि की कथाएं। इसी प्रकार धार्मिक दृष्टांतों के अंतर्गत भी लघु कथाओं के अनेक उदाहरण मिल सकते हैं। आधुनिक कहानी के संदर्भ में ‘लघु कथा’ का अपना स्वतंत्र महत्व एवं अस्तित्व है। प्रेमचंद व ‘प्रसाद’ से लेकर जैनेंद्र व ‘अज्ञेय’ तक इस धारा की एक समृद्ध परंपरा है। प्रेमचंद ने अपनी कहानी-कला के उत्कर्ष काल में लघु कथाओं के रूप में … Read more

अनुसंधान (Research) और आलोचना (Criticism)| Anusandhan aur Alochana

7 min read

अनुसंधान (शोध) और आलोचना (समालोचना, समीक्षा) को पर्यायवाची समझना सही नहीं है, क्योंकि दोनों में आधारभूत अंतर है। शब्दकोशों में दोनों की अलग-अलग परिभाषा दी गई है । वेब्स्टर की ‘न्यू वर्ल्ड डिक्शनरी’ में ‘अनुसंधान’ को परिभाषित करते हुए ‘इसे व्यवस्थित, सावधानीपूर्वक और संतुलित अन्वेषण (खोज, ढूंढ़ना) कहा गया है, जिसमें ज्ञान के किसी विशेष क्षेत्र में स्थापित तथ्यों या सिद्धांतों की खोज की जाती है ।’   आलोचना में विश्लेषण के आधार पर निर्णय करने की प्रक्रिया होती है । साहित्य या कला के संबंध में विश्लेषण की विभिन्न प्रणालियों का समालोचना में प्रयोग किया जाता है ।समालोचना विश्लेषण के उपरांत मूल्यांकन भी करती है । ‘न्यू वर्ल्ड डिक्शनरी’ में ही निर्णय करने की प्रक्रिया को आलोचना कहा गया है। कलात्मक संसार का समालोचनात्मक विश्लेषण और उसका मूल्यांकन आवश्यक है । समालोचक की कला यह है कि वह साहित्य पर अपनी टिप्पणी दे। उसकी समीक्षा करे और साथ ही … Read more

विश्वकोश और उनके प्रकार | Vishvakosh aur Unke Prakar| Encyclopaedia

12 min read

विश्वकोश या Encyclopaedia में विश्व के अनेक विषयों – धर्म, दर्शन, साहित्य, कला, इतिहास, भूगोल, ज्ञान-विज्ञान आदि से संबद्ध जानकारी दी जा ती है जिसे विषय के अधिकारी विद्वानों से लिखवाया जाता है। शीर्षकों को इसमें विषयानुसार न रखकर वर्णक्रम से रखा जाता है ताकि अध्येता (fellow or research scholar) किसी भी शब्द को, यह पता न होने पर भी कि यह किस विषय से संबद्ध शब्द है; आसानी से ढूंढ़ सके। विश्वकोश (Encyclopedia) का महत्व भी साहित्य कोश के समान ही है—अर्थात् विषयों तथा अवधारणाओं के बारे में समुचित जानकारी देना।     किसी भी पुस्तकालय में आपको अनेक खंडों में प्रकाशित अंग्रेजी के अनेक विश्वकोश मिल जाएँगे, जैसे Encyclopaedia Britannica, American Encyclopaedia, Collins Encyclopaedia आदि। हिन्दी में भी डॉ. नगेन्द्रनाथ वसु द्वारा प्रस्तुत “हिन्दी विश्व विश्वकोश” पचीस खंडों में उपलब्ध है। विश्वकोशों की परिभाषा एवं विस्तार क्षेत्र विश्वकोश का अंग्रेजी रूपान्तर ‘इन्साइक्लोपीडिया‘ ग्रीक शब्द “enkyklios paideia” से व्युत्पन्न हुआ … Read more

काव्य में लोक-मंगल की साधनावस्था – आचार्य रामचन्द्र शुक्ल | Kavya men Lokmangak ki Sadhnavastha – Acharya Ramchandra Shukla

10 min read

आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने ऐसे काव्यों को, जिनमें मंगल का विधान (कल्याण करने का उद्देश्य) करने वाला भाव ‘करुणा’ बीज रूप में विद्यमान रहता है, श्रेष्ठ घोषित करके ‘लोक मंगल की साधना’ को काव्य-प्रतिमान के रूप में प्रतिष्ठित किया है । उनका तर्क है कि लोक में मंगल का विधान करने वाले दो भाव हैं- ‘करुणा’ और ‘प्रेम’। ‘करुणा’ की गति लोक की रक्षा की ओर होती है और ‘प्रेम’ की गति लोक के रंजन की ओर । (लोकरंजन = लोगों को खुश करके उनका विश्वास प्राप्त करना)  ‘लोक-मंगल’ शब्द को विशिष्ट अर्थ देने का श्रेय आचार्य रामचंद्र शुक्ल को है। लोक-मंगल के दोनों अंशभूत शब्द ‘लोक’ और ‘मंगल’ आचार्य शुक्ल को भारतीय परंपरा के प्रवाह से प्राप्त हुए हैं। सामान्यतः ‘लोक’ शब्द से तात्पर्य है ‘सामान्य जन’ और ‘मंगल’ से तात्पर्य है ‘कल्याण’, किंतु यह शब्द आचार्य रामचंद्र शुक्ल के यहां नये अर्थ के साथ प्रयुक्त हुआ है।  आचार्य शुक्ल ने ‘लोक’ शब्द का … Read more

हिंदी में करियर के अवसर | Hindi men Career ke Avasar

10 min read

आज हम यह जानने का प्रयास करेंगे कि हिंदी विषय के साथ करियर के कौन-कौन से अवसर उपलब्ध हैं। वर्तमान परिदृश्य में सभी लोगों के मन में यह धारणा प्रचलित है कि अंग्रेजी का अच्छा ज्ञान ही आपके उज्ज्वल भविष्य का निर्माण करता है । यह अलग बात है कि अंग्रेजी में करियर के कितने अधिक अवसर उपलब्ध हैं इसका लोगों को कुछ अधिक ज्ञान है । Hindi men Career ke Avasar भी अंग्रेजी से कुछ कम नहीं हैं, लेकिन लोगों की इसकी जानकारी नहीं होने के कारण वे इसका लाभ नहीं उठा पाते और हिंदी विषय के साथ अपना करियर बनाने का सोच भी नहीं पाते ।  तो चलिए अब हम देखते हैं कि Hindi men Career ke Avasar कौन-कौन से हैं और हम कैसे हिंदी विषय की पढ़ाई करके और इस भाषा में विशेषज्ञता हासिल करके अपने उज्ज्वल भविष्य का निर्माण कर सकते हैं । वास्तव में सरकारी क्षेत्र … Read more

रेखाचित्र का उद्भव और विकास | Rekhachitra ka Udbhav aur Vikas

10 min read

अंग्रेजी के ‘स्केच’ शब्द का पर्यायवाची रेखाचित्र’ है। हिंदी में इसे ‘शब्दचित्र’ भी कहते हैं। व्यक्तिचरित्र, शब्दांकन, चरित्रलेख इत्यादि इसके अन्य नाम हैं। शब्दों के द्वारा जब किसी घटना, वस्तु, स्थान, दृश्य अथवा व्यक्ति का इस प्रकार भावपूर्ण वर्णन किया जाये कि पाठक के मन पर उसका यथार्थ चित्र खींच जाये तो उसे ‘रेखाचित्र’ कहते हैं। तो आइए अब rekhachitra ka udbhav aur vikas का विस्तृत रूप से अध्ययन करते हैं ।  ‘रेखाचित्र’ का एक स्वतंत्र विधा के रूप में विकास द्विवेदी युग में हुआ। पद्मसिंह शर्मा रेखाचित्र के प्रवर्तक माने जाते हैं। इनकी रचना ‘पद्मपराग’ (1929 ई.) से हिंदी-रेखाचित्र शर्मा की ‘बोलती प्रतिमा’ को हिंदी का प्रथम रेखाचित्र माना है। प्राणों का सौदा (1939 ई.), जंगल के जीव (1949 ई). वे जीते कैसे हैं (1957 ई.)  श्रीराम शर्मा के अन्य प्रसिद्ध रेखाचित्र हैं। रेखाचित्र-साहित्य में बनारसीदास चतुर्वेदी एक अविस्मरणीय हस्ताक्षर (लेखक) हैं। इन्होंने ‘मधुकर’ के रेखाचित्र विशेषांक (1946 ई.) … Read more

प्रशासनिक हिंदी की चुनौतियाँ और समस्याएँ | Prashasanik Hindi ki Chunautiyan aur Samasyayen

16 min read

प्रशासनिक हिंदी मूलतः अनुवाद के माध्यम से विकसित हुई है । अनुवाद की भाषा होने के कारण इसकी अपनी कुछ विशिष्टताएँ हैं जो शब्दावली, वाक्य विन्यास से लेकर अभिव्यक्ति शैली और अर्थवत्ता तक व्याप्त है । हिंदी का यह रूप अपेक्षाकृत नया है ।  जैसा कि होता रहा है हर नई चीज़ को स्वीकृति मिलने में समय लगता है उसी तरह प्रशासनिक हिंदी को स्वीकृति मिलने में समय लगा है और लग रहा है। आज हम prashasanik hindi ki chunautiyan aur samasyayen का विस्तार से अध्ययन करेंगे । हर नई चीज़ को लेकर कुछ प्रश्न चिन्ह लगाए जाते हैं,  कुछ समस्याएँ उठती हैं ।  दूसरी ओर उन प्रश्नों और समस्याओं के समाधान भी खोजे जाते हैं । उनकी चुनौतियों का मुक़ाबला किया जाता है । हिंदी के साथ भी यही स्थिति है । यह लेख इन्हीं प्रश्नों, समस्याओं और चुनौतियों से संबंधित है ।    यहाँ यह देखने का प्रयास किया गया है … Read more

प्रशासनिक क्षेत्र में अनुवाद की आवश्यकता और स्थिति | Prashasanik Kshetra men Anuvad Ki Awashyakta aur Sthiti

16 min read

  जब भारत स्वाधीन हुआ तथा प्रशासनिक आदि कार्यों में भारतीय भाषाओं के प्रयोग की बात सोची जाने लगी तब आरंभ में अनुवाद का सहारा लिया जाना अस्वाभाविक नहीं था। भारत के संविधान के अनुसार जहाँ अनुच्छेद 343 में संघ की राजभाषा के रूप में हिंदी को अपनाया गया वहीं अनुच्छेद 345 में राज्यों की राजभाषा के रूप में उन प्रदेशों में प्रयुक्त हो रही भाषाओं को या हिंदी को अपनाए जाने का उपबंध किया गया ।  इससे पूर्व प्रशासनिककार्यों में अधिकांशतः अँग्रेजी का प्रयोग हो रहा था,अतः भाषा परिवर्तन के लिए संक्रमण काल में अनुवाद की भूमिका स्पष्ट थी । भारत के विभिन्न भागों में अभी भी कहीं-कहीं बहुभाषिक स्थिति है तथा वह स्थिति काफी देर तकबनी रहेगी, उसके अनुसार अनुवाद का महत्व भी बना रहेगा । यहाँ यह भली-भाँति समझ लेना चाहिए कि समस्त प्रशासनिक कामकाज अनुवादके माध्यम से ही सम्पन्न किया जाना अपेक्षित नहीं है । अपेक्षा … Read more

error: Content is protected !!
↑